Friday, April 05, 2019

Mitr (Friend) Wahi Hai....

सुंदर विपुल चंचला का
नंबर दिलवा दे, *मित्र वही है..*

मधुशाला का नित्य निमंत्रण
जो दिलवा दे, *मित्र वही है..*

व्यथित ह्रदय हो पीड़ा में तब
विल्स जला दे, *मित्र वही है..*

मधु पात्रों में भर के मदिरा
पैग बना दे, *मित्र वही है..*





*मैथिली शरण गुप्त से लिखना छूट गया था....*
😃

1 comment:

Webroot.com/safe said...

Pow beautiful poetry is this.


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