Tuesday, May 29, 2018

Makaan chahey kacchey tthey...

🐢

             *"... मकान*
                       *सारे कच्चे थे"*

           *- हरिवंश राय बच्चन*

گهر سڀ ڪچا هئا  ----- هريونش راءِ بچن

मकान चाहे
कच्चे थे
लेकिन रिश्ते
सारे सच्चे थे …

شايد گهر سڀ ڪچا هئا
پر رشتا سڀ سچا هئا

चारपाई पर
बैठते थे
पास पास
रहते थे …

کٽ تي وِهندا هُئاسين
ويجهو ويجهو رهندا هئاسين

सोफे और डबल बेड
आ गए
दूरियां
हमारी बढा गए ...

جڏھن سوفا ۽ ڊبل بيڊ اچي ويا
وڇوٽيون اسان جون وڌنڌيون ويون

छतों पर
अब न सोते हैं
कहानी किस्से
अब न होते हैं ...

اڄ ڇتين تي نٿا سمهون
ڪهاڻيون ڪِسا بہ نٿا چئون

आंगन में
वृक्ष थे
सांझा करते
सुख दुख थे …

اڱر ٻاهر وڻ هوندا هئا
سک دک ونڊيا ويندا هئا

दरवाजा
खुला रहता था
राही भी
आ बैठता था …

دروازا کُلا رهندا هئا
ايندڙ ويندڙ بہ اندر اچي وهندا هئا

कौवे भी
कांवते थे
मेहमान
आते जाते थे …

ڪانوَ ڪان ڪان ڪندا هئا
مهمان ايندا ويندا هئا …

इक साइकिल ही
पास थी
फिर भी
मेल जोल की आस थी …

سائيڪل هڪ ئي هوندي هئي
پوءِ بہ ميل ميلاپ جي آس رهندي هئي …

रिश्ते
निभाते थे
रूठते
मनाते थे …
رشتا نباهيندا هئاسين
رٺل کي منائيندا هئاسين …

पैसा चाहे
कम था
माथे पे
ना गम था …

پوءِ ناڻو بلاشڪ گهٽ ھو
پر مٿي تي ڪو گم نہ هو

मकान
चाहे कच्चे थे
रिश्ते
सारे सच्चे थे …

گهر بلاشڪ ڪچا هئا
پر رشتا سڀ سچا هئا …

अब शायद
कुछ पा लिया है
पर लगता है कि
बहुत कुछ गंवा दिया है ...

شايد هاڻ گهڻو ڪجهہ ڪمايو آ
پر لڳي ٿو گهڻو ڪجهہ وڃايو آ …

जीवन की
भाग-दौड़ में –
क्यूँ वक़्त के साथ
रंगत खो जाती है ?
हँसती-खेलती
ज़िन्दगी भी
आम हो जाती है।

جيون جي ڍُڪ ڊوڙ ۾ -
ڇو وقت ساڻ رنگيني گم ٿيندي آهي؟
کلندڙ ٽپندڙ زندگي عام ٿي ويندي آهي ؟

एक सवेरा था
जब हँस कर
उठते थे हम
और आज
कई बार
बिना मुस्कुराये ही
शाम
हो जाती है ...!!

هڪ صبح ھو جڏھن کلندا اُٿندا هئاسين
۽ اڄ ڪيتريون شام ويلون
بنا مسڪرائيندي گذري وينديون آهن !!
कितने
दूर
निकल गए,
रिश्तो को
निभाते निभाते ...

ڪيترو تہ پري لنگهي آيا آهيون
رشتن کي نباهيندي نباهيندي …

खुद को
खो दिया हमने,
अपनों को
पाते पाते ...

پنهنجي "پاڻُ " کي وڃائي ڇڏيو آ
پنهنجن کي پائيندي پائيندي …

मकान
चाहे कच्चे थे ...
रिश्ते
सारे सच्चे थे …

گهر بلاشڪ ڪچا هئا …
پر رشتا سڀ سچا هئا …

                         ✨

1 comment:

Anonymous said...

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